राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अध्यादेश, 2019

राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अध्यादेश, 2019

संख्या प.4(7)विधि/2/2019.- राजस्थान राज्य के राज्यपाल द्वारा दिनांक 18 दिसंबर, 2019 को बनाया तथा प्रख्यापित किया गया निम्नांकित अध्यादेश सर्वसाधारण की सूचनार्थ एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है: राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अध्यादेश, 2019

(2019 का अध्यादेश संख्यांक 4)
(राज्यपाल महोदय द्वारा 18 दिसंबर, 2019 को बनाया तथा प्रख्यापित किया गया)

राजस्थान राज्य में निवास करने वाले व्यष्टि को सुशासन के अध्युपाय के रूप में लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं और सेवाओं, जिसके लिए राज्य की समेकित निधि से व्यय उपगत किया जाता है, के दक्ष, पारदर्शी और लक्ष्यित परिदान के लिए, जन आधार आई.डी. को अभिज्ञापक के रूप में उपयोग में लाने के लिए; राजस्थान जन आधार प्राधिकरण का गठन और उससे संबद्ध या आनुषंगिक विषयों का, उपबंध करने के लिए अध्यादेश।

यत:, राजस्थान राज्य विधान सभा सत्र में नहीं है और राजस्थान राज्य के राज्यपाल का यह समाधान हो गया है कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण तुरन्त कार्रवाई करना उनके लिए आवश्यक हो गया है;

अत: अब, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में इसके द्वारा निम्नलिखित अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात्:

अध्याय 1 प्रारंभिक

  1. संक्षिप्त नाम, प्रसार और प्रारंभ.-
    1. इस अध्यादेश का नाम राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अध्यादेश, 2019 है।
    2. इसका प्रसार संपूर्ण राजस्थान राज्य में होगा।
    3. यह तुरन्त प्रवृत्त होगा।
  2. परिभाषाएं.-
    1. इस अध्यादेश में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,
      • (क) “आधार संख्यांक” से केन्द्रीय अधिनियम की धारा 3 की उप-धारा (3) के अधीन किसी व्यष्टि को जारी की गयी पहचान संख्यांक अभिप्रेत है;
      • (ख) “अधिप्रमाणन” से ऐसी प्रक्रिया अभिप्रेत है जिसके द्वारा किसी व्यष्टि की जनसांख्यिकीय सूचना और बायोमैट्रिक सूचना सहित आधार संख्यांक केन्द्रीय पहचान आंकड़े निक्षेपागार को, और जन आधार आई.डी., जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार को, उसके सत्यापन के लिए प्रस्तुत की जाती है और ऐसा निक्षेपागार उसके पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर उसकी शुद्धता को या कमी को सत्यापित करता है;
      • (ग) “प्राधिकरण” से धारा 19 के अधीन स्थापित और गठित राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अभिप्रेत है;
      • (घ) “बायोमैट्रिक सूचना” से किसी व्यष्टि का फोटो, अंगुलि छाप, आइरिस स्कैन, या ऐसी अन्य जैविक विशेषता, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाये, अभिप्रेत है;
      • (ङ) “केन्द्रीय अधिनियम” से आधार (वित्तीय और अन्य सहायिकियों, प्रसुविधाओं और सेवाओं का लक्ष्यित परिदान) अधिनियम, 2016 (2016 का केन्द्रीय अधिनियम सं. 18) अभिप्रेत है;
      • (च) “जनसांख्यिकीय सूचना” में किसी व्यष्टि का नाम, जन्म की तारीख, पता, जाति, जनजाति, हकदारी का अभिलेख, आय और चिकित्सीय इतिहास और अन्य सुसंगत सूचना सम्मिलित है;
      • (छ) “नामांकन” से इस अध्यादेश की धारा 6 के अधीन किसी कुटुंब का नामांकन अभिप्रेत है;
      • (ज) “कुटुंब” से रक्त, विवाह या दत्तकग्रहण द्वारा एक दूसरे से संबंधित सदस्यों का ऐसा समूह अभिप्रेत है जो सामान्य रूप से साथ-साथ निवास और भोजन कर रहा हो;
      • (झ) “निधि” से धारा 28 के अधीन स्थापित प्राधिकरण की निधि अभिप्रेत है;
      • (ञ) “सरकारी निकाय” से राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन, नियंत्रणाधीन या के द्वारा सारभूत रूप से वित्तपोषित कोई निकाय अभिप्रेत है;
      • (ट) “कुटुंब का मुखिया” से कुटुंब के सदस्यों द्वारा विहित रीति से कुटुंब के मुखिया के रूप में घोषित कुटुंब की अठारह वर्ष या उससे अधिक आयु की कोई महिला सदस्य अभिप्रेत |
        परन्तु यदि नामांकन के समय किसी कुटुंब में अठारह वर्ष या उससे अधिक आयु की कोई महिला सदस्य नहीं हो तो कुटुंब के इक्कीस वर्ष या उससे अधिक आयु के किसी भी पुरुष सदस्य को, कुटुंब की किसी पात्र महिला के उसका स्थान लेने तक, कुटुंब का मुखिया घोषित किया जा सकेगा; या नामांकन के समय किसी कुटुंब में इक्कीस वर्ष या उससे अधिक आयु के किसी भी पुरुष सदस्य के नहीं होने की दशा में, कुटुंब के किसी भी लिंग के किसी सबसे बड़े सदस्य को कुटुंब के सदस्यों द्वारा कुटुंब का मुखिया घोषित किया जा सकेगा। यदि कुटुंब का ऐसा मुखिया पुरुष है तो वह कुटुंब की किसी पात्र महिला के उसका स्थान लेने तक ही इस प्रकार बना रह सकता है;
      • (ठ) कुटुंब के किसी सदस्य के संबंध में “पहचान सूचना” में उसका आधार संख्यांक और उसकी जनसांख्यिकीय सूचना सम्मिलित है;
      • (ड) “जन आधार आई.डी.” से धारा 6 के अधीन किसी कुटुंब की पहचान के लिए जारी की गयी विशिष्ट जन आधार आई.डी. अभिप्रेत है;
      • (ढ) “जन आधार मंच” से इस अध्यादेश के उपबंधों के अधीन निवासी और सरकारी विभाग/सरकारी निकाय के बीच सृजित कोई इलैक्ट्रानिक मेकेनिज्म आफ इन्टरफेस अभिप्रेत है;
      • (ण) “जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार” से इस अध्यादेश की धारा 9 के अधीन सृजित जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार अभिप्रेत है;
      • (त) “विहित” से इस अध्यादेश के अधीन बनाये गये नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
      • (थ) “लोक कल्याणकारी प्रसुविधा” से राज्य सरकार द्वारा प्रत्यक्ष रूप से या किसी सरकारी निकाय के माध्यम से किसी व्यष्टि या किसी कुटुंब को, चाहे नकद या वस्तु रूप में, प्रदान किया गया कोई भी लाभ, दान, पुरस्कार, अनुतोष, सहायता, सहायिकी या कोई भी संदाय अभिप्रेत है और इसमें ऐसी अन्य प्रसुविधाएं सम्मिलित हैं जो राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित की जायें;
      • (द) “हकदारी का अभिलेख” से किसी कार्यक्रम या स्कीम के अधीन लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं और सेवाओं, जिनके लिए कोई कुटुंब या उसका कोई भी सदस्य हकदार है, का अभिलेख अभिप्रेत है;
      • (ध) “रजिस्ट्रार” से इस अध्यादेश के अधीन नामांकन के प्रयोजन के लिए प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत या मान्यताप्राप्त कोई इकाई अभिप्रेत है;
      • (न) “विनियम” से इस अध्यादेश के अधीन प्राधिकरण द्वारा बनाये गये विनियम अभिप्रेत हैं;
      • (प) “निवेदक इकाई” से कोई सरकारी विभाग या सरकारी निकाय अभिप्रेत है जो जन आधार आई.डी., पहचान सूचना और फोटो (यदि अपेक्षित हो) अधिप्रमाणन के लिए जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार को प्रस्तुत करता है;
      • (फ) “निवासी” से, उसके सभी व्याकरणिक रूपभेदों सहित, ऐसा निवासी, जिसने राजस्थान के किसी स्थानीय क्षेत्र में पूर्ववर्ती छह मास या इससे अधिक के लिए निवास किया है, या ऐसा व्यक्ति, जो उस क्षेत्र में आगामी छह मास या उससे अधिक के लिए निवास करने का आशय रखता है, अभिप्रेत है;
      • (ब) “नियम” से इस अध्यादेश के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाये गये नियम अभिप्रेत हैं;
      • (भ) “सेवा” से किसी कुटुंब या किसी व्यष्टि को किसी भी रूप में प्रदान की गयी कोई सामग्री, सुविधा, उपयोगिता या कोई अन्य सहायता अभिप्रेत है और इसमें ऐसी अन्य सेवाएं सम्मिलित हैं जो राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित की जायें;
      • (म) “सत्यापन” से नामांकन के समय कुटुंब के मुखिया या किसी वयस्क सदस्य द्वारा प्रस्तुत किये गये पहचान आंकड़ों की शुद्धता को सत्यापित करने की प्रक्रिया अभिप्रेत है।
    2. इस अध्यादेश में प्रयुक्त किन्तु इसमें ऊपर परिभाषित नहीं किये गये शब्दों और अभिव्यक्तियों का क्रमश: वही अर्थ होगा जो उन्हें केन्द्रीय अधिनियम के अधीन समनुदेशित किया गया है।

अध्याय 2 अधिप्रमाणन

3. अधिप्रमाणन और लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं और सेवाओं की प्राप्ति के लिए आधार और/या जन आधार का सबूत आवश्यक.– (1) राज्य सरकार, किन्हीं लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं और सेवाओं की प्राप्ति के लिए, जिनका व्यय राज्य की समेकित निधि से उपगत किया जाता है, किसी व्यष्टि की पहचान एक शर्त के रूप में स्थापित करने के प्रयोजन के लिए, यह अपेक्षा कर सकेगी कि ऐसा व्यष्टि अधिप्रमाणन करवाये या आधार संख्यांक और/या जन आधार आई.डी. के कब्जे का सबूत दे या ऐसे किसी व्यष्टि के मामले में, जिसे कोई आधार संख्यांक और जन आधार आई.डी. समनुदिष्ट नहीं किया गया है, ऐसा व्यष्टि नामांकन के लिए आवेदन करेः
परन्तु जब तक किसी व्यष्टि को आधार संख्यांक और जन आधार आई.डी. समनुदिष्ट नहीं किया जाता है तब तक उस व्यष्टि को लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं और सेवाओं के परिदान के लिए आनुकल्पिक और व्यवहार्य साधनों का प्रस्ताव किया जायेगा।

4. राज्य सरकार द्वारा स्कीम अधिसूचित करना.– राज्य सरकार, समय-समय पर, ऐसी लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं और सेवाओं को, जिनके लिए धारा 3 के अनुसार ऐसे अधिप्रमाणन या सबूत अपेक्षित हैं, अधिसूचित करेगी।

5. केन्द्रीय अधिनियम के अध्याय 3 का लागू होना.- केन्द्रीय अधिनियम के अध्याय 3 के उपबंध इस अध्यादेश के अधीन अधिप्रमाणन पर, यथावश्यक परिवर्तनों सहित, लागू होंगे।

अध्याय 3 जन आधार कार्ड

6. जन आधार कार्ड के लिए नामांकन.-

  1. राज्य का प्रत्येक निवासी कुटुंब, अपने मुखिया के माध्यम से या किसी सबसे बड़े या वयस्क सदस्य के माध्यम से, अपने सभी सदस्यों की पहचान सूचना और फोटो विहित रीति से प्रस्तुत करके जन आधार कार्ड प्राप्त करने का हकदार होगा।
  2. उप-धारा (1) के अधीन कुटुंब के सदस्यों की पहचान सूचना और फोटो की प्राप्ति पर प्राधिकरण, सूचना का ऐसी रीति से, जो विहित की जाये, सत्यापन करने के पश्चात्, कुटुंब का नामांकन करेगा और कुटुंब को एक विशिष्ट जन आधार आई.डी. समनुदिष्ट करेगा जो विशिष्ट रेंडम संख्यांक है।

7. जन आधार आई.डी. की मुख्य बातें.-

  1. किसी कुटुंब को समनुदिष्ट जन आधार आई.डी. विशिष्ट संख्यांक है और यह किसी भी अन्य कुटुंब को पुनः समनुदिष्ट नहीं किया जायेगा।
  2. जन आधार आई.डी. रेंडम संख्यांक होगा और जन आधार आई.डी. धारक की विशेषताओं या पहचान से उसका कोई संबंध नहीं है।
  3. भौतिक या इलैक्ट्रानिक रूप से जन आधार आई.डी. को, अधिप्रमाणन और ऐसी अन्य शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, जो विहित की जायें, लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं और सेवाओं के प्रयोजन के लिए कुटुंब के सदस्यों की पहचान के सबूत और पते के सबूत के रूप में स्वीकार किया जायेगा और अन्य किसी प्रयोजन के लिए भी पहचान के सबूत और पते के सबूत के रूप में स्वीकार किया जा सकेगा।
    स्पष्टीकरण.- इस उप-धारा के प्रयोजनों के लिए अभिव्यक्ति “इलैक्ट्रानिक रूप” का वही अर्थ होगा जो उसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का केन्द्रीय अधिनियम सं. 21) की धारा 2 की उप-धारा (1) के खण्ड (द) में समनुदेशित किया गया है।

8. जन आधार कार्ड.-

  1. धारा 6 के अधीन नामांकन हो जाने पर प्राधिकरण, कुटुंब के मुखिया को ऐसे प्ररूप में, ऐसी रीति से और ऐसी फीस, यदि कोई हो, जो विहित की जाये, के संदाय पर जन आधार कार्ड जारी करेगा।
  2. यदि कुटुंब का कोई भी सदस्य इस निमित्त किये गये किसी आवेदन द्वारा ऐसी वांछा करे तो उसे भी ऐसे प्ररूप में, ऐसी रीति से और ऐसी फीस, यदि कोई हो, जो विहित की जाये, के संदाय पर व्यष्टिक जन आधार कार्ड जारी किया जा सकेगा।

अध्याय 4 जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार और सूचना की संरक्षा

9. जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार का सृजन.-

  • (1) प्राधिकरण सभी जन आधार कार्ड धारकों की पहचान सूचना और फोटो का डाटाबेस जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार के रूप में ऐसी रीति से, जो विहित की जाये, सृजित और संधारित करेगा।
  • (2) प्राधिकरण जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार सृजित और संधारित करने के लिए और जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार के बारे में ऐसे किन्हीं भी अन्य कृत्यों का, जो विहित किये जायें, पालन करने के लिए ऐसी किसी भी एजेंसी को, जिसे वह समुचित समझे, लगा सकेगा।

10. सूचना की सुरक्षा और गोपनीयता.-

  1. प्राधिकरण जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार में के डाटा की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करेगा।
  2. उप-धारा (1) की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्राधिकरण
    • (क) समुचित तकनीकी और संगठनात्मक सुरक्षा उपाय अंगीकृत और कार्यान्वित करेगा;
    • (ख) यह सुनिश्चित करेगा कि इस अध्यादेश के अधीन प्राधिकरण के किसी भी कृत्य का पालन करने के लिए नियुक्त या लगायी गयी एजेंसियां, परामर्शी, सलाहकार या अन्य व्यक्ति सूचना के लिए समुचित तकनीकी और संगठनात्मक सुरक्षा उपाय रखते हैं; और
    • (ग) यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसी एजेंसियों, परामर्शियों, सलाहकारों या अन्य व्यक्तियों के साथ किये गये करार या ठहराव इस अध्यादेश के अधीन प्राधिकरण पर अधिरोपित बाध्यताओं के समान बाध्यताएं अधिरोपित करते हैं और ऐसी एजेंसियों, परामर्शियों, सलाहकारों या अन्य व्यक्तियों से केवल प्राधिकरण के अनुदेशों पर कार्य करने की अपेक्षा करेगा।
  3. इस अध्यादेश में यथा अन्यथा उपबंधित के सिवाय, प्राधिकरण या उसके कोई भी अधिकारी या अन्य कर्मचारी या ऐसी कोई भी एजेंसी, जो जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार का संधारण करती है, चाहे अपनी सेवा के दौरान या उसके पश्चात्, जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार या अधिप्रमाणन अभिलेख में भंडारित कोई भी सूचना, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अनुसार के सिवाय, किसी को भी प्रकट नहीं करेगीः
    परन्तु जन आधार कार्ड धारक की जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार में भंडारित कोई भी सूचना ऐसे धारक को उसके द्वारा किये गये अनुरोध पर विनियमों में विनिर्दिष्ट रीति से प्रकट की जा सकेगी।
  4. केन्द्रीय अधिनियम के अध्याय 6 के उपबंध इस अध्यादेश के अधीन सूचना की संरक्षा पर, यथावश्यक परिवर्तनों सहित, लागू होंगे।

राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अध्यादेश, 2019

11. सूचना साझा करने पर निबंधन.-

  1. जन आधार कार्ड धारक की इस अध्यादेश के अधीन संगृहीत कोई भी पहचान सूचना और फोटो, इस अध्यादेश के उपबंधों के अनुसार के सिवाय, किसी भी कारण से चाहे वह जो कोई भी हो, किसी के साथ साझा नहीं किया जायेगा।
  2. जन आधार, पहचान सूचना और फोटो को, ऐसे प्रयोजनों के सिवाय, जो विहित किये जायें, सार्वजनिक रूप से प्रकाशित, प्रदर्शित या पोस्ट नहीं किया जायेगा।
  3. इस अध्यादेश के उपबंधों के अनुसार सरकार द्वारा जन आधार और पहचान सूचना का उपयोग कल्याणकारी स्कीमों के लिए हिताधिकारियों की पहचान और प्राकृतिक विपत्तियों/आपदाओं के मामले में सूचना प्रसार के लिए किया जा सकेगा।

12. किसी निवेदक इकाई द्वारा सूचना को साझा किया जाना.-

  1. किसी निवेदक इकाई के पास उपलब्ध पहचान सूचना और फोटो,
    • (क) पहचान सूचना के अधिप्रमाणन का अनुरोध प्रस्तुत करते समय जन आधार आई.डी. धारक के लिए विनिर्दिष्ट से भिन्न किसी अन्य प्रयोजन के लिए निवेदक इकाई द्वारा उपयोग में नहीं लिये जायेंगे; और
    • (ख) जन आधार आई.डी. धारक की पूर्व सहमति के बिना आगे प्रकट नहीं किये जायेंगे।
  2. कोई निवेदक इकाई, कुटुंब के अनुरोध पर संबंधित जन आधार आई.डी. धारक के साथ जन आधार आई.डी. धारक के अधिप्रमाणन लॉग को साझा कर सकेगी।

13. पहचान सूचना और फोटो में परिवर्तन.-

  1. यदि जन आधार कार्ड धारक कुटुंब के किसी सदस्य की कोई भी पहचान सूचना और फोटो अशुद्ध पाया जाता है या उसमें बाद में परिवर्तन हो जाता है तो कुटुंब का मुखिया या कुटुंब का कोई भी अन्य वयस्क सदस्य प्राधिकरण को ऐसी पहचान सूचना या, यथास्थिति, फोटो का जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार में ऐसी रीति से, जो विहित की जाये, परिवर्तन करने के लिए अनुरोध कर सकेगा।
  2. प्राधिकरण, स्वप्रेरणा से, या उप-धारा (1) के अधीन कोई अनुरोध प्राप्त होने पर, ऐसी जांच या/और सत्यापन के पश्चात्, जो वह उचित समझे, ऐसे परिवर्तन कर सकेगा जो जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार में अपेक्षित हों, और ऐसे परिवर्तन की सूचना कुटुंब के मुखिया और संबंधित सदस्य को ऐसी रीति से, जो विहित की जाये, दे सकेगा।
  3. जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार में कोई भी पहचान सूचना और फोटो, इस अध्यादेश में उपबंधित रीति के सिवाय, परिवर्तित नहीं किया जायेगा।

अध्याय 5 सेवाओं का परिदान और प्रसुविधाओं का सीधा अन्तरण

14. सेवाओं का परिदान.-

  1. राज्य सरकार, किसी कुटुंब या उसके किन्हीं भी सदस्यों की पहचान लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं और सेवाओं की प्राप्ति के लिए एक शर्त के रूप में स्थापित करने के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय अधिनियम की धारा 7 के अधीन, जन आधार मंच के माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं की सूची अधिसूचित कर सकेगी।
  2. प्राधिकरण, ई-मित्र नेटवर्क या ऐसे अन्य साधनों, जो वह उचित समझे, के माध्यम से, लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं और सेवाओं का परिदान हिताधिकारियों को उनके घर तक या उनके निवास-स्थान के आसपास करने का प्रयास करेगा।
  3. ई-मित्र नेटवर्क का प्रशासन, नियंत्रण और प्रबंधन प्राधिकरण में निहित होगा।

15. हिताधिकारी को प्रसुविधा का सीधा अन्तरण.- राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट कर सकेगी कि कोई भी लोक कल्याणकारी प्रसुविधा, जब कभी ऐसी प्रसुविधाएं नकद प्रकृति की हों, अधिप्रमाणन के पश्चात्, हिताधिकारी के बैंक खाते में, और यदि लोक कल्याणकारी प्रसुविधाएं कुटुंब से संबंधित हैं तो कुटुंब के मुखिया के बैंक खाते में, ऐसी रीति से जो विहित की जाये, सीधे अंतरित की जायेंगी।

16. सेवा परिदान के लिए जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार का उपयोग.-

  1. राज्य सरकार, सरकारी विभाग या सरकारी निकाय के माध्यम से, धारा 4 और धारा 14 के अधीन यथा अधिसूचित सभी लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं और सेवाओं का परिदान, अधिप्रमाणन के पश्चात्, जन आधार मंच के माध्यम से करेगी।
  2. धारा 14 के अधीन अधिसूचित लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं के संबंध में प्रत्येक विभाग, किसी कुटुंब या उसके किसी भी सदस्य के अपने विभागीय डाटाबेस को जन आधार आई.डी., बैंक खाता संख्यांक और आधार संख्यांक से ऐसी रीति से युक्त करेगा जो विहित की जाये।
  3. जब एक बार विभागीय डाटाबेस को युक्त किये जाने का कार्य पूरा हो जाता है तो विभाग अपने स्वयं के स्तर पर और कोई डाटाबेस सृजित नहीं करेगा और भविष्य में किन्हीं भी लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं का अन्तरण और सेवाओं का परिदान करने के लिए किसी कुटुंब या उसके किसी भी सदस्य की जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार में उपलब्ध पहचान सूचना और फोटो का उपयोग करेगा।

17. संव्यवहार मैपर.– केन्द्रीय अधिनियम की धारा 7 के अधीन अधिसूचित लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं या सेवाओं का और इस अध्यादेश की धारा 4 के अधीन अधिसूचित लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं या सेवाओं का प्रत्येक संव्यवहार इलैक्ट्रानिक रूप से ऐसी रीति से अभिलिखित किया जायेगा जो विहित की जाये।

18. सामाजिक लेखापरीक्षा.

  1. लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं के परिदान की सामाजिक लेखापरीक्षा ऐसे अन्तरालों पर और ऐसी रीति से, जो ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभा में और नगरीय क्षेत्रों में वार्ड समिति में या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किसी अन्य पीठ में विहित की जाये, की जायेगी।
  2. लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं के परिदान की विशिष्टियां राज्य के जन सूचना पोर्टल पर सदैव अपलोड की जायेंगी।
    स्पष्टीकरण.- इस धारा के प्रयोजन के लिए अभिव्यक्ति “ग्राम सभा” और “वाई समिति” का वही अर्थ होगा जो उन्हें राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 23) और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 (2009 का अधिनियम सं. 18) में क्रमशः समनुदिष्ट किया गया है।

अध्याय 6 राजस्थान जन आधार प्राधिकरण

19. प्राधिकरण का स्थापन और गठन.-

  1. राज्य सरकार, इस अध्यादेश के प्रारंभ के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, अधिसूचना द्वारा, इस अध्यादेश या तदधीन बनाये गये नियमों या विनियमों के अधीन प्राधिकरण की शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन करने के लिए राजस्थान जन आधार प्राधिकरण के नाम से एक प्राधिकरण की स्थापना और गठन करेगी।
  2. प्राधिकरण पूर्वोक्त नाम से एक निगमित निकाय होगा और उसका शाश्वत उत्तराधिकार और एक सामान्य मुद्रा होगी और उसे इस अध्यादेश के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, स्थावर और जंगम दोनों संपत्ति अर्जित, धारित और व्ययनित करने और संविदा करने की शक्ति होगी और वह उक्त नाम से वाद कर सकेगा या उसके विरुद्ध वाद लाया जा सकेगा।
  3. प्राधिकरण का मुख्यालय जयपुर में होगा।
  4. प्राधिकरण, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से, राज्य में अन्य स्थानों पर अपने कार्यालय स्थापित कर सकेगा।
  5. प्राधिकरण, अध्यक्ष और ऐसी संख्या में शासकीय और गैर-शासकीय सदस्यों, जैसेकि राज्य सरकार नियुक्त करे, से मिलकर बनेगा।
  6. राज्य का मुख्य सचिव प्राधिकरण का अध्यक्ष होगा।

राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अध्यादेश, 2019

20. प्राधिकरण की शक्तियां और कृत्य.- प्राधिकरण निम्नलिखित शक्तियों का प्रयोग और निम्नलिखित कृत्यों का निर्वहन करेगा, अर्थात्:

  • (क) विनियमों द्वारा, रजिस्ट्रारों और नामांकन एजेंसियों की नियुक्ति और उनकी नियुक्तियों के प्रतिसंहरण के लिए निबंधन और शर्ते विनिर्दिष्ट करना;
  • (ख) हिताधिकारियों को लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं और अन्य सेवाओं के परिदान के लिए विद्यमान इलैक्ट्रानिक अवसंरचना का विस्तार करना;
  • (ग) जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार सृजित, मानीटर और संधारित करना;
  • (घ) जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार के उपयोग के लिए नीति बनाना;
  • (ङ) जन आधार मंच में नयी सेवाएं जोड़ने के लिए राज्य सरकार को सिफारिश करना;
  • (च) लाइन एजेंसियों के सहयोग से राज्य के निवासियों के वित्तीय समावेश के लिए समुचित कदम उठाना;
  • (छ) अपनी सिफारिशों के कार्यान्वयन को मानीटर करना;
  • (ज) विभिन्न सरकारी विभागों और सरकारी निकायों के बीच समन्वय करना;
  • (झ) जन आधार मंच के माध्यम से उपलब्ध करायी गयी लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं और सेवाओं को मानीटर करना;
  • (ञ) विनियम बनाना और संशोधित करना;
  • (ट) प्राधिकरण को उसके कृत्यों और शक्तियों का निर्वहन करने में सहायता देने के लिए ऐसी समितियां या कार्य बल या समूह या उप-समितियां नियुक्त करना जो आवश्यक हों;
  • (ठ) जब कभी अपेक्षित हो, अपनी बैठकों में विशेषज्ञों को आमंत्रित करना;
  • (ड) ऐसी कोई भी स्थावर या जंगम संपत्ति, जो प्राधिकरण के क्रियाकलापों के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक या सुविधाजनक हो, को क्रय, विनिमय, पट्टे, भाड़े द्वारा या अन्यथा अर्जित करना;
  • (ढ) सहायता, कारपोरेट सामाजिक दायित्व या कोई भी अन्य सहायता स्वीकार करना;
  • (ण) राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से सरकार, बैंकों, वित्तीय संस्थाओं से धन उधार लेना;
  • (त) राज्य में और राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध भिन्न-भिन्न डाटाबेस को जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार के साथ सिंक्रोनाइज करने और एकीकृत करने के लिए एक कामन मेकेनिज्म डिजाइन करना;
  • (थ) विभिन्न प्रारूपों में भंडारित कुटुंब और व्यष्टि डाटाबेस के दोहराव को रोकते हुए यथावत और व्यापक जन आधार निवासी आंकड़े निक्षेपागार डिजाइन करना;
  • (द) डैशबोर्ड का रखरखाव करना और कालिक रूप से और राज्य सरकार द्वारा मांग किये जाने पर विश्लेषी रिपोर्ट तैयार करना;
  • (ध) लाइन विभागों के तकनीकी दल के साथ समन्वय करना;
  • (न) समाज के कमजोर वर्ग के लिए विभिन्न वित्तीय संस्थाओं (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक आदि) को लगाकर संस्थागत वित्त (उधार) के लिए अवसर सृजित करना;
  • (प) बैंकिंग कोरेस्पोन्डेन्ट नेटवर्क के सृजन के लिए बैंकों से समन्वय करना;
  • (फ) बैंकिंग कोरेस्पोन्डेन्ट नेटवर्क को नियुक्त और प्रबंध करना;
  • (ब) डिजिटल संदाय और आधार समर्थित संदाय के प्रचार के लिए अवसंरचना में वृद्धि करना;
  • (भ) बैंक रहित क्षेत्रों में नकद निकासी और संव्यवहार सुविधाएं उपलब्ध करवाना;
  • (म) राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के माध्यम से बैंकों के साथ समन्वय करना और बैंकिंग कार्यक्षेत्र को विस्तारित करना;
  • (य) क्रेडिट और बीमा स्कीमों का विस्तार करना;
  • (यक) राजस्व गांवों में ए.टी.एम. स्थापित करना;
  • (यख) प्राधिकरण के अधीन विनियमों की विरचना के माध्यम से ई-मित्र नेटवर्क विनियमित करना;
  • (यग) ई-मित्र नेटवर्क का रखरखाव और वृद्धि करना;
  • (यघ) ई-मित्र के वर्तमान नेटवर्क को कियोस्कों के अधिक स्वचालन और यंत्रीकरण के प्रोत्साहन द्वारा नवीकरण करना;
  • (यङ) ई-वाणिज्य सेवाओं के लिए ई-मित्र को भौतिक परिदान निक्षेपागार के रूप में विकसित करना;
  • (यच) ई-मित्र को परिदान के लिए प्रोत्साहित करके ई-मित्र द्वारा प्रमाण-पत्रों इत्यादि का घर तक परिदान सुनिश्चित करना;
  • (यछ) ई-मित्र के साथ कियोस्क नेटवर्क स्थापित करना और उसका रखरखाव करना;
  • (यज) ई-मित्र कियोस्क संचालकों को बैंक, लाइन विभागों और ई-वाणिज्य विशेषज्ञों की सहायता से प्रशिक्षित करना; और
  • (यझ) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करना जो इस अध्यादेश के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक, आनुषंगिक या साधक हों।

21. गैर-शासकीय सदस्यों की पदावधि और सेवा की अन्य शर्ते.-

  1. प्राधिकरण का गैरशासकीय सदस्य उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, तीन वर्ष की अवधि तक या राज्य सरकार के प्रसादपर्यंत, जो भी पहले हो, पद धारण करेगा।
  2. गैर-शासकीय सदस्य को संदेय भत्ते और सेवा के अन्य निबंधन और शर्ते ऐसी होंगी जो विहित की जायें।
  3. गैर-शासकीय सदस्य राज्य सरकार को लिखित में नोटिस देकर अपना पदत्याग कर सकेगा और ऐसा पदत्याग राज्य सरकार द्वारा स्वीकार कर लिये जाने पर, ऐसे गैर-शासकीय सदस्य के लिए यह समझा जायेगा कि उसने अपना पद त्याग दिया है।

22. प्राधिकरण की बैठकें.-

  1. प्राधिकरण वर्ष में कम से कम एक बार अपनी बैठक ऐसे स्थान और ऐसे समय पर करेगा जो उसका अध्यक्ष विनिश्चित करे और अपनी बैठकों में कारबार के संव्यवहार के संबंध में ऐसी बैठकों में गणपूर्ति सहित प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा जो विनियमों द्वारा अधिकथित किये जायें।
  2. अध्यक्ष, या यदि वह किसी भी कारण से प्राधिकरण की किसी भी बैठक में उपस्थित होने में असमर्थ हो तो बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा चुना गया कोई भी अन्य सदस्य, बैठक की अध्यक्षता करेगा।
  3. ऐसे सभी प्रश्न, जो प्राधिकरण की किसी भी बैठक में उठाये जाते हैं, उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से विनिश्चित किये जायेंगे और मत समान होने की दशा में अध्यक्ष, या उसकी अनुपस्थिति में पीठासीन व्यक्ति, का निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग करेगा।

23. कार्यकारिणी समिति का गठन.-

  1. राज्य सरकार, अधिसूचना वारा, प्राधिकरण की कार्यकारिणी समिति का गठन करेगी।
  2. कार्यकारिणी समिति ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगी जो उसे प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर प्रत्यायोजित किये जायें।
  3. कार्यकारिणी समिति तीन मास में कम से कम एक बार अपनी बैठक ऐसे स्थान और ऐसे समय पर करेगी जो उसका अध्यक्ष विनिश्चित करे और अपनी बैठकों में कारबार के संव्यवहार के संबंध में ऐसी बैठकों में गणपूर्ति सहित प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगी जो विनियमों द्वारा अधिकथित किये जायें।
  4. अध्यक्ष, या यदि वह किसी भी कारण से कार्यकारिणी समिति की किसी भी बैठक में उपस्थित होने में असमर्थ हो तो बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा चुना गया कोई भी अन्य सदस्य, बैठक की अध्यक्षता करेगा।
  5. ऐसे सभी प्रश्न, जो कार्यकारिणी समिति की किसी भी बैठक में उठाये जाते हैं, उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से विनिश्चित किये जायेंगे और मतों की समानता होने की दशा में अध्यक्ष, या उसकी अनुपस्थिति में पीठासीन व्यक्ति, का निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग करेगा।

24. प्राधिकरण और कार्यकारिणी समिति के आदेशों का अधिप्रमाणन.- प्राधिकरण और कार्यकारिणी समिति के सभी आदेश, विनिश्चय और अन्य लिखतें प्राधिकरण या, यथास्थिति, कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष या प्राधिकरण या, यथास्थिति, कार्यकारिणी दवारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी भी अन्य सदस्य या किसी अधिकारी के हस्ताक्षरों से अधिप्रमाणित की जायेंगी।

25. महानिदेशक की नियुक्ति.- राज्य सरकार द्वारा शासन सचिव से अनिम्न रैंक के किसी अधिकारी को प्राधिकरण का महानिदेशक नियुक्त किया जायेगा। वह, प्राधिकरण के साधारण नियंत्रण के अध्यधीन रहते हुए, निम्नलिखित शक्तियों का प्रयोग, निम्नलिखित कृत्यों का पालन और निम्नलिखित कर्तव्यों का निर्वहन करेगा, अर्थात्:

  • (क) प्राधिकरण के सभी अधिकारियों और सेवकों का पर्यवेक्षण और उन पर नियंत्रण रखना;
  • (ख) लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं और अन्य सेवाओं के परिदान की रूपरेखा तैयार करना और उनकी प्रभावी मानीटरी तथा क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना;
  • (ग) प्राधिकरण की संपत्तियों, अभिलेखों और निधियों का प्रबंध करना;
  • (घ) प्राधिकरण के लेखाओं का, कालिक रूप से जांच और संपरीक्षा सहित, सही और उचित संधारण करना;
  • (ङ) प्राधिकरण की वार्षिक आय और व्यय के लेखे और तुलनपत्र तैयार करना;
  • (च) विभिन्न कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में समय-समय पर की गयी प्रगति को सम्मिलित करते हुए अद्यतन और पूर्ण सांख्यिकी सूचना संधारित करना;
  • (छ) वित्तीय सहायता के लिए परियोजना प्रस्तावों की प्रक्रिया करना और उनके उपयोगिता प्रमाणपत्र जारी करना;
  • (ज) प्राधिकरण के मुख्य उद्देश्यों के संबंध में बैठकें, सेमीनार और कार्याशालाएं आयोजित करना और रिपोर्ट तैयार करना और उन पर अनुवर्ती कार्रवाई करना;
  • (झ) प्राधिकरण के विभिन्न पहलुओं के बारे में आम जनता को जानकारी देने के लिए विडियो, वृत्तचित्र, प्रचार सामग्री, साहित्य और प्रकाशन तैयार करना; और
  • (ञ) ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करना जो उसे प्राधिकरण द्वारा प्रत्यायोजित किये जायें।

26. अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति.-

  1. प्राधिकरण, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से, प्राधिकरण में अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के ऐसी संख्या में पद और उनके प्रवर्ग सृजित कर सकेगा जो वह इस अध्यादेश के अधीन अपने कृत्यों के निष्पादन के लिए आवश्यक समझे और उन पर नियुक्ति कर सकेगा।
  2. प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन और भत्ते, और सेवा के अन्य निबंधन और शर्ते ऐसी होंगी जो प्राधिकरण द्वारा, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से, विनियमों द्वारा अवधारित की जायें और, निधि में से संदत्त किये जायेंगे।

राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अध्यादेश, 2019

अध्याय 7 अनुदान, लेखे, लेखापरीक्षा और वार्षिक रिपोर्ट

27. राज्य सरकार द्वारा प्राधिकरण को अनुदान.- राज्य सरकार, राज्य विधान-मण्डल द्वारा विधि द्वारा इस निमित्त किये गये सम्यक् विनियोग के पश्चात्, प्राधिकरण को अनुदान के रूप में ऐसी धनराशि संदत्त करेगी जो राज्य सरकार इस अध्यादेश के प्रयोजनों के लिए उपयोग में लिये जाने के लिए उचित समझे।

28. प्राधिकरण की निधि.-

  1. इस अध्यादेश के प्रयोजनों के लिए राजस्थान जन आधार प्राधिकरण निधि के नाम से एक निधि स्थापित की जायेगी।
  2. राज्य सरकार द्वारा धारा 27 के अधीन संदत्त की गयी धनराशि के अतिरिक्त, निधि में निम्नलिखित जमा किया जायेगा, अर्थात्:
    • (क) वित्त विभाग के पूर्व अनुमोदन से प्राधिकरण द्वारा जुटायी गयी सहायता और उधार;
    • (ख) प्राधिकरण द्वारा फीस के रूप में प्राप्त कोई भी धनराशि;
    • (ग) वित्त विभाग के पूर्व अनुमोदन से प्राधिकरण द्वारा प्राप्त कोई भी अन्य धनराशि।
  3. प्राधिकरण द्वारा निधि का उपयोग इस अध्यादेश के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने में उपगत खर्चों की पूर्ति करने में किया जायेगा जिसमें प्राधिकरण के गैर-शासकीय सदस्यों को भत्तों का संदाय, प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारिवृन्द को वेतन और भत्तों का संदाय सम्मिलित

29. प्राधिकरण का बजट.-

  • (1) प्राधिकरण प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, प्राधिकरण की प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय दर्शित करते हुए आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अपना बजट ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, जो विहित किया जाये, तैयार करेगा और उसे राज्य सरकार के अनुमोदन के लिए अग्रेषित करेगा।
  • (2) प्राधिकरण राज्य सरकार द्वारा यथा-अनुमोदित बजट उपबंधों के अनुसार से अन्यथा कोई भी व्यय उपगत नहीं करेगा।

30. वार्षिक रिपोर्ट.- प्राधिकरण, पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान अपने क्रियाकलापों का पूर्ण लेखा और आगामी वर्ष के लिए अपनी योजनाएं बताते हुए, अपनी वार्षिक रिपोर्ट ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर तैयार करेगा जो विहित की जाये और उसकी प्रति राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा। प्रत्येक वार्षिक रिपोर्ट में पूर्ववर्ती वार्षिक रिपोर्ट में अन्तर्विष्ट योजनाओं के बारे में प्राधिकरण के कार्यनिष्पादन का पुनर्विलोकन भी अन्तर्विष्ट होगा।

31. लेखे और लेखापरीक्षा.-

  • (1) प्राधिकरण के लेखे ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जो विहित किये जायें, संधारित किये जायेंगे और उनकी लेखापरीक्षा निदेशक, स्थानीय निधि लेखापरीक्षा विभाग द्वारा या ऐसे अन्य व्यक्ति या निकाय द्वारा की जायेगी जो राज्य सरकार समय-समय पर अवधारित करे।
  • (2) प्राधिकरण अपने लेखापरीक्षित लेखाओं की प्रति, उन पर लेखापरीक्षक की रिपोर्ट के साथ, राज्य सरकार को ऐसी तारीख के पूर्व प्रस्तुत करेगा जो विहित की जाये।

32. वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षक की रिपोर्ट का राज्य विधान-मंडल के सदन के समक्ष रखा जाना.– राज्य सरकार प्राधिकरण की वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षक की रिपोर्ट उनके प्राप्त होने के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, राज्य विधान-मण्डल के सदन के समक्ष रखवायेगी।

अध्याय 8 अपराध और शास्तियां

33. सूचना की सुरक्षा और गोपनीयता से संबंधित उपबंधों के अननुपालन के लिए शास्ति.जो कोई भी जन आधार कार्ड धारक की पहचान सूचना और फोटो को धारा 10 के उल्लंघन में साझा या प्रकाशित करता है, वह ऐसे जुर्माने से, जो दस हजार रुपये तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा और ऐसे व्यक्ति को प्रतिकर देने का दायी होगा जिस पर ऐसी विफलता से प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

34. निवेदक इकाई द्वारा अप्राधिकृत उपयोग के लिए शास्ति.- जो कोई भी निवेदक इकाई होने पर धारा 12 के उल्लंघन में किसी व्यष्टि की पहचान सूचना का उपयोग करता है, वह ऐसे जुर्माने से, जो दस हजार रुपये तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा और ऐसे व्यक्ति को प्रतिकर देने का दायी होगा जिस पर ऐसे उल्लंघन से प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

35. कंपनियों द्वारा अपराध.

  1. जहां इस अध्यादेश के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है, वहां ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो अपराध किये जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन में उस कंपनी का भारसाधक था और उसके प्रति उत्तरदायी था, और साथ ही वह कंपनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जायेंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किये जाने और दंडित किये जाने के भागी होंगेः
    परन्तु इस उप-धारा में अंतर्विष्ट कोई बात ऐसे किसी व्यक्ति को इस अध्यादेश में उपबंधित किसी दंड का भागी नहीं बनायेगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध को निवारित करने के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी।
  2. उप-धारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अध्यादेश के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है, या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जायेगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किये जाने और दंडित किये जाने का भागी होगा।
    स्पष्टीकरण.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए
    (क) “कंपनी” से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत कोई फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम है; और
    (ख) किसी फर्म के संबंध में, “निदेशक” से फर्म का कोई भागीदार अभिप्रेत है।

अध्याय 9 विविध

36. सदस्यों, अधिकारियों इत्यादि का लोक सेवक होना.- प्राधिकरण और कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष और सदस्य तथा प्राधिकरण और कार्यकारिणी समिति के अधिकारी और अन्य कर्मचारी, जब इस अध्यादेश के उपबंधों के अनुसरण में कार्य कर रहे हों या कार्य करने के लिए तात्पर्यित हों, भारतीय दंड संहिता (1860 का केन्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझे जायेंगे।

37. राज्य सरकार की निदेश जारी करने की शक्ति.

  • (1) इस अध्यादेश के पूर्वगामी उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्राधिकरण, इस अध्यादेश के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करने या अपने कृत्यों का पालन करने में नीति के प्रश्नों पर ऐसे निदेशों द्वारा आबद्ध होगा, जो राज्य सरकार समय-समय पर लिखित में उसे दे।
  • (2) राज्य सरकार का विनिश्चय, कि कोई प्रश्न नीति का है या नहीं, अंतिम होगा।

38. शक्तियों और कृत्यों का प्रत्यायोजन.- प्राधिकरण, लिखित में साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस अध्यादेश के अधीन की अपनी ऐसी शक्तियां और कृत्य, धारा 40 के अधीन की शक्ति को छोड़कर, जिन्हें वह आवश्यक समझे, प्राधिकरण की कार्यकारिणी समिति, किसी भी सदस्य या अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी शर्तों, यदि कोई हों, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जायें, के अध्यधीन रहते हुए, प्रत्यायोजित कर सकेगा।

39. सद्भावपूर्वक की गयी कार्रवाई के लिए संरक्षण.- राज्य सरकार या प्राधिकरण या कार्यकारिणी समिति, या प्राधिकरण या कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष या किसी भी सदस्य, या प्राधिकरण या कार्यकारिणी समिति के किसी भी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध, इस अध्यादेश या तदधीन बनाये गये नियम या विनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गयी या किये जाने के लिए आशयित किसी भी बात के लिए कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी।

40. राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति.- राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अध्यादेश के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।

41. प्राधिकरण की विनियम बनाने की शक्ति.- प्राधिकरण, अधिसूचना द्वारा, ऐसे विषयों का उपबंध करने के लिए, जो इस अध्यादेश द्वारा विनियमों द्वारा उपबंधित किये जाने अपेक्षित हैं, इस अध्यादेश और तदधीन बनाये गये नियमों से संगत विनियम बना सकेगा।

42. नियमों और विनियमों का राज्य विधान-मंडल के सदन के समक्ष रखा जाना.- इस अध्यादेश के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और विनियम, उसके इस प्रकार बनाये जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, राज्य विधान-मंडल के सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिन से अन्यून की कालावधि के लिए, जो एक सत्र में या दो या अधिक उत्तरोत्तर सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी, रखा जायेगा और यदि उस सत्र की, जिसमें वह इस प्रकार रखा गया है, या ठीक अगले सत्रों की समाप्ति के पूर्व राज्य विधान-मंडल का सदन ऐसे किसी भी नियम या विनियम में कोई उपांतरण करता है या यह संकल्प करता है कि ऐसा कोई नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् नियम या विनियम केवल ऐसे उपांतरित रूप में प्रभावी होगा या, यथास्थिति, उसका कोई प्रभाव नहीं होगा तथापि, ऐसा कोई भी उपांतरण या बातिलकरण उसके अधीन पूर्व में की गयी किसी बात की विधिमान्यता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।

43. अन्य विधियों का लागू होना वर्जित नहीं.- इस अध्यादेश के उपबंध तत्समय प्रवृत्त किसी भी अन्य विधि के अतिरिक्त होंगे न कि उसके अल्पीकरण में।

44. कठिनाइयों का निराकरण करने की शक्ति.-

  • (1) यदि इस अध्यादेश के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अध्यादेश के उपबंधों से असंगत न हों और जो कठिनाई का निराकरण करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों:
    परन्तु इस धारा के अधीन ऐसा आदेश इस अध्यादेश के प्रारंभ की तारीख से दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जायेगा।
  • (2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश उसके किये जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, राज्य विधान-मण्डल के सदन के समक्ष रखा जायेगा।

45. निरसन और व्यावृत्ति.-

  • (1) इस अध्यादेश के प्रारम्भ से ही, राजस्थान भामाशाह (लोक कल्याणकारी प्रसुविधाओं का सीधा अंतरण और सेवाओं का परिदान) अधिनियम, 2017 (2017 का अधिनियम सं. 24) निरसित हो जायेगा।
  • (2) उप-धारा (1) के अधीन निरसन, ऐसे निरसित अधिनियम के पूर्ववर्ती प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगा और निरसित अधिनियम के उपबंधों द्वारा या अधीन की गयी कोई बात या की गयी कार्रवाई या की गयी समझी गयी कोई बात या की गयी समझी गयी कोई कार्रवाई, जहां तक इस अध्यादेश के उपबंधों से असंगत नहीं है, इस अध्यादेश के तत्समान उपबंधों के अधीन की गयी समझी जायेगी और तब तक प्रवर्तन में रहेगी जब तक कि इस अध्यादेश के अधीन की गयी कोई बात या की गयी कार्रवाई द्वारा अतिष्ठित न कर दी जाये।
  • (3) ऐसे निरसित अधिनियम के अधीन किये गये या जारी किये गये कोई नियम, अधिसूचना या आदेश, इस अध्यादेश के अधीन किये गये या जारी किये गये समझे जायेंगे, जहां तक ऐसे नियम, अधिसूचना या आदेश इस अध्यादेश के उपबंधों से असंगत न हों और तब तक प्रवर्तन में रहेंगे जब तक कि इन्हें इस अध्यादेश के अधीन किये गये या जारी किये गये नियमों, अधिसूचना या आदेश द्वारा अतिष्ठित न किया गया हो।

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