राजस्थान औद्योगिक नीति

राजस्थान औद्योगिक नीति

राजस्थान में बेहतर औद्योगिक वातावरण निर्मित करने के लिए राजस्थान औद्योगिक नीति की घोषणा की गई।

राजस्थान में औद्योगिक नीतियों का निर्माण

राजस्थान में बेहतर औद्योगिक वातावरण निर्मित करने के लिए औद्योगिक नीति की घोषणा की गई। राजस्थान सरकार अपने स्तर पर स्वदेशी और विदेशी उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए प्रयत्नशील है। राजस्थान सरकार द्वारा अब तक सात औद्योगिक नीतियाँ घोषित की गई हैं।

  • प्रथम औद्योगिक नीति(1978) –
    • घोषणा – 24 जून, 1978
    • प्रथम औद्योगिक नीति तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत के कार्यकाल में लागू की गई थी। इसमें रोजगारोन्मुख उद्योग (खादी, ग्रामोद्योग, हथकरघा व हस्तशिल्प) के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
  • द्वितीय औद्योगिक नीति(1990) –
    • घोषणा – दिसम्बर 90 को घोषित व अप्रैल,1991 से लागू।
    • मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत के कार्यकाल में लागू इस नीति में खनन, कृषिगत व अन्य साधनों के अधिकतम उपयोग, रोजगार संवर्द्धन तथा औद्योगिकीकरण के माध्यम से राज्य के वित्तीय साधन बढ़ाने पर जोर दिया गया।
  • तृतीय औद्योगिक नीति(1994) –
    • घोषणा – 15 जून, 1994
    • मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत के कार्यकाल में लागू तृतीय नीति में राज्य का तीव्र गति से औद्योगीकरण का लक्ष्य रखा गया जिसमें मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए निजी क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया गया
  • चतुर्थ औद्योगिक नीति(1998) –
    • घोषणा – 4 जून, 1998
    • मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत के कार्यकाल में लागू चतुर्थ नीति का उद्देश्य राज्य को कुछ चुने हुए क्षेत्रों में विनियोग की दृष्टि से सर्वोच्च प्राथमिकता वाला राज्य बनाना था। इस हेतु समूहों के विकास की रणनीति अपनाई गई।
  • पांचवीं औद्योगिक नीति(2010)-
    • घोषणा – जून 2010 को लागू की गई थी।
    • 5वीं औद्योगिक नीति राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में लागू की गई थी।
  • छठी औद्योगिक नीति (2015)-
    • घोषणा – 8 अगस्त 2015
    • छठी औद्योगिक नीति राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल में लागू की गई थी।

राजस्थान औद्योगिक नीति 2019

राजस्थान को ईको सिस्टम के साथ भारत में सबसे पंसदीदा निवेश गंतव्य के रूप में उभारने हेतु समावेशी, संतुलित, सतत एवं पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक विकास करने, आधारभूत ढांचा सृजित करने, रोजगार के अवसर सृजित करने, संतुलित क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण से राजस्थान औद्योगिक विकास नीति, 2019 तैयार की गई है।

उद्देश्य

  • अनुकूल औद्योगिक आधारभूत संरचना
  • प्रतियोगात्मक राजकोषीय प्रोत्साहन
  • कुशल मानव संसाधन, उद्यमशीलता एवं नवाचार
  • संतुलित क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा
  • पर्यावरण संरक्षण एवं सतत् औद्योगिक विकास
  • उद्योगों का तकनीकी उन्नयन
  • नियमों और निरीक्षणों को युक्तिसंगत बनाना
  • थस्ट सेक्टर्स का विकास करना

विशेष प्रावधान

  • भूमि अधिग्रहण की प्रकिया को लचीला बनाना
  • निजी भूमि-रीको द्वारा निवेश तथा रीको की भूमि-निजी निवेश मॉडल पर पीपीपी मोड पर औद्योगिक पार्कों का विकास आर्थिक विकास के मुख्य क्षेत्रों पर विशेष बल
  • विभिन्न क्षेत्रों में कौशल विकास कार्यक्रम पर बल प्लग एंड प्ले सुविधाओं एवं बहुमंजिला कारखानों को बढ़ावा देना
  • पिछड़े क्षेत्र में उद्योग स्थापना हेतु रियायती दर पर बंजर भूमि का आवंटन
  • पेट्रो केमिकल उद्योग के लिए तेल रिफाईनरी के पास औद्योगिक टाऊनशिप बिजली दरों को परिवर्तनशील बनाना एवं व्हीलिंग चार्जेज कम करना
  • मैन्युफेक्चरिंग एवं सेवा क्षेत्र के उद्यम हेतु प्रोत्साहन पैकेज
  • थ्रस्ट सेक्टर एवं पिछड़े व अति पिछड़े क्षेत्रों के उद्योगों को अतिरिक्त प्रोत्साहन
  • एंकर इकाइयों को आकर्षक प्रोत्साहन एवं स्टार्टअप हेतु नई स्टार्टअप नीति का निर्माण • एमएसएमई को गुणवत्ता प्रमाणन, रिसर्च एण्ड डवलपमेंट आदि के लिए सहायता
  • अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला उद्यमियों, कुटीर उद्योगों, फुटकर व्यापारियों एवं स्वयं सहायता समूह के उद्यमियों के लिए विशेष योजना का प्रावधान ।
  • बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई की आपूर्ति श्रृंखला लिंकेज को प्रोत्साहन जिला स्तर पर व्यावसायिक सुविधा केन्द्र की स्थापना का प्रावधान
  • सभी क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु वार्षिक नवाचार पुरस्कार का प्रावधान औद्योगिक अपशिष्ट के पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण को प्रोत्साहित करना
  • ग्रीन बिल्डिंग एवं इको फ्रेंडली उद्योगों को सहायता तथा वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहन
  • अनुसंधान एवं विकास केन्द्रों, परीक्षण और प्रमाणीकरण प्रयोगशालाओं को सहायता

राजस्थान औद्योगिक विकास नीति 2019 – डाउनलोड पीडीऍफ़

पंचवर्षीय योजनायें जिनमे औद्योगिक विकास पर बल दिया गया :-

द्वितीय पंचवर्षीय योजना(1956-61) – देश में उत्प्रेरक औद्योगिक वातावरण तैयार करने हेतु द्वितीय पंचवर्षीय योजना में महालनोबिस मॉडल के आधार पर औद्योगिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।

आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-97) – राजस्थान में आठवीं पंचवर्षीय योजना में आधारभूत सुविधाओं के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई तथा राज्य के औद्योगिक विकास हेतु एक विस्तृत कार्यक्रम बनाया गया। राज्य में औद्योगिक विकास पर सर्वाधिक व्यय किया गया (कुल परियोजना व्यय का 5.3%)

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