राजस्थान में ऋतुएँ

राजस्थान में ऋतुएँ

राजस्थान में ऋतुएँ: राजस्थान में जलवायु का अध्ययन करने पर मुख्य रूप से 4 प्रकार की ऋतुएं पाई जाती हैः-

  • ग्रीष्म ऋतु : मार्च से मध्य जून तक
  • वर्षा ऋतु : मध्य जून से सितम्बर तक
  • शरद ऋतु : सितम्बर से नवम्बर तक
  • शीत ऋतु : नवम्बर से फरवरी तक

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ग्रीष्म ऋतु

राजस्थान में मार्च से मध्य जून तक ग्रीष्म ऋतु होती है। इस ऋतु में सूर्य उत्तरी गोलार्ध में रहता है मार्च में सूर्य उत्तर में कर्क रेखा की और बढ़ने लगता है तथा जून में सूर्य कर्क रेखा पर सीधा चमकता है।
ग्रीष्मऋतु में राजस्थान में सूर्य की तीव्र किरणों, अत्यधिक तापमान, शुष्क व गर्म हवाओं तथा वाष्पीकरण की अधिकता के कारण वायु मे नमी समाप्त हो जाती है जिससे वायु हल्की होकर उपर चली जाती है।अतः राजस्थान में निम्न वायुदाब का क्षेत्र बनता है परिणामस्वरूप उच्च वायुदाब से वायु निम्न वायुदाब की और तेजगति से आती है इससे गर्मियों में आंधियों का प्रवाह बना रहता है। गर्म शुष्क हवाओं को “लू ” कहते है।

ग्रीष्मऋतु से जुड़े कुछ मुख्य बिंदु :

  • राजस्थान का सर्वाधिक गर्म महीना – जून
  • सबसे अधिक गर्म जिला – चूरू
  • सबसे अधिक वार्षिक तापांतर वाला जिला – चूरू
  • न्यूनतम तापांतर वाला जिला – सिरोही (माउंट आबू)
  • सर्वाधिक शुष्क जिला – जैसलमेर
  • सर्वाधिक गर्म व शुष्क स्थान – फलोदी (जोधपुर)
  • राजस्थान का सर्वाधिक आंधियों वाला जिला – गंगानगर
  • न्यूनतम आंधियां – झालावाड़
  • सूर्य की सबसे सीधी किरणें बांसवाड़ा में गिरती है क्योंकि बांसवाड़ा तथा डूंगरपुर के मध्य से कर्क रेखा गुजरती है।

वर्षा ऋतु

राजस्थान में वर्षा ऋतु का समय मध्य जून से सितंबर तक होता है। राजस्थान में वर्षा मानसून के कारण होती है। मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के मौसिम शब्द से हुई है। जिसका अर्थ मौसम है

  • मानसून शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अरबी विद्वान अल मसूदी द्वारा किया गया था।
  • प्रथम सदी में एक अरबी नाविक हिप्पोलस ने मानसून की खोज की (अवधारणा) थी।

राजस्थान में वर्षा ऋतु में वर्षा दो प्रकार के मानसून से होती हैं:

  1. अरब सागर के मानसून से वर्षा
  2. बंगाल की खाड़ी के मानसून से वर्षा

अरब सागर के मानसून से वर्षा

राजस्थान में सर्वप्रथम अरब सागर का मानसून प्रवेश करता है। यह भारत के पश्चिमी तट पर वर्षा करता हुआ गुजरात काठिया वाड़ में वर्षा कर राजस्थान में बांसवाड़ा जिले में प्रवेश करता है। यह मानसून राजस्थान में अधिक वर्षा नहीं कर पाता क्योंकि अरावली पर्वतमाला की स्थिति इसके समानान्तर है।

  • राजस्थान के दक्षिणी हिस्से जैसे-डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर तथा बांसवाड़ा जिलों में अरब सागर वाले मानसून से वर्षा होती है।
  • अरब सागर का मानसून लौटते समय राजस्थान के उत्तरी पश्चिमी हिस्से जैसे बीकानेर का कुछ भाग तथा गंगानगर में वर्षा करता है।
  • अरब सागर के मानसून और बंगाल की खाड़ी के मानसून का मिलन हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला नामक स्थान पर होता है।

बंगाल की खाड़ी के मानसून से वर्षा

बंगाल की खाड़ी का मानसून राजस्थान में पूर्वी दिशा से प्रवेश करता है। पूर्वी दिशा से प्रवेश के कारण मानसूनी हवाओं को पूरवइयां के नाम से जाना जाता है। यह मानसून अरावली पर्वतमाला के लंबवत होने के कारण अपेक्षाकृत अधिक वर्षा करता है। इसके कारण राजस्थान के पूर्वी व दक्षिणी-पूर्वी भाग में सर्वाधिक वर्षा होती है।

वर्षा ऋतु से जुड़े कुछ मुख्य बिंदु :

  • सर्वाधिक वर्षा वाला जिला – झालावाड़
  • दूसरा सर्वाधिक वर्षा वाला जिला – बांसवाड़ा
  • न्यूनतम वर्षा वाला जिला – जैसलमेर
  • न्यूनतम वर्षा वाला स्थान- फलौदी
  • सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान – माऊण्ट आबू
राजस्थान मानसून 2018

शरद ऋतु

वर्षा के बाद इस ऋतु के आरम्भ में आकाश स्वच्छ होने के कारण तापमान 38 डिग्री सेंटीग्रेड तक बढ़ जाता है। इस ऋतु में सबसे धीमी हवाएं चलती है। किन्तु सूर्य के दक्षिणायन होते जाने से तापमान धीरे धीरे गिरने लगता है। उत्तरी राजस्थान में 20 डिग्री सेंटीग्रेड से दक्षिण की ओर 30 डिग्री सेंटीग्रेड तक तापमान रहता है।

  • समय : सितम्बर से नवम्बर

शीत ऋतु

राजस्थान में शीत ऋतु का आगमन नवंबर के मध्य से होता है। और यह मध्य मार्च तक रहती है। शीत ऋतु के दौरान सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में होता है। 22 दिसंबर को सूर्य मकर रेखा पर सीधा चमकता है। जिसके कारण 22 दिसंबर राजस्थान का सबसे छोटा दिन वह सबसे बड़ी रात है।

शीत ऋतु से जुड़े कुछ मुख्य बिंदु :

  • राजस्थान का सबसे ठण्डा माह – जनवरी
  • राजस्थान का सबसे ठण्डा जिला – चूरू
  • राजस्थान का सबसे ठण्डा स्थान – माऊण्ट आबू
  • राजस्थान का दूसरा सबसे ठण्डा स्थान – डबोक (उदयपुर)
  • मावठ – राजस्थान में शीत ऋतु में उत्तर-पूर्वी मानसून से या भूमध्यसागरीय मानसून या पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली वर्षा को मावठ कहते हैं।
    • मावठ की वर्षा रबी की फसल के लिए अति उपयोगी मानी जाती है इसीलिए इस वर्षा को सोने की बुँदे भी कहते है।
    • राजस्थान में मावठ की वर्षा क्रमशः श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू तथा झुन्झुनू जिलों में होती है।
  • पाला पड़ना – शीत ऋतु के दौरान सूर्य पूर्णतः दक्षिणायन होता है जिससे में सूर्यताप कम हो जाता है।
    • सूर्यताप कम होने से तापमान में आई भारी गिरावट को पाला पड़ना कहते है।

भारतीय ऋतु चक्र

विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहां समय-समय पर छः ऋतुएं अपनी छटा बिखेरती हैं। प्रत्येक ऋतु दो मास की होती है।

क्र. सं.ऋतुमाह
(भारतीय पंचांग)
माह
(ग्रेगोरियन कैलेंडर)
1.बसंत ऋतुचैत्र और बैसाख़मार्च – अप्रैल
2.ग्रीष्म ऋतुज्येष्ठ और आषाढ़मई -जून
3.वर्षा ऋतुश्रावण और भाद्र पदजुलाई – अगस्त
4.शरद ऋतुअश्विन और कार्तिकसितम्बर – अक्टूबर
5.हेमन्त ऋतुमार्गशीर्ष और पौषनवम्बर – दिसंबर
6.शिशिर माघ और फाल्गुनजनवरी – फरवरी

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