राजस्थान की बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं

राजस्थान की बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं

राजस्थान की बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं | भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को ‘आधुनिक भारत का मंदिर’ कहा था| बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं मूल रूप से उद्देश्य – बांधों के निर्माण के माध्यम से कृषि सिंचाई का प्रबंध, जल विद्युत् का उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरण की रक्षा, अन्तः-स्थलीय नौपरिवहन का विकास, भू-संरक्षण और मछली पालन का विकास रहा हैं | राजस्थान की प्रमुख बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं इस प्रकार हैं:

क्र:सं: परियोजना का नाम नदी लाभान्वित राज्य
1भाखड़ा-नाँगल परियोजनासतलज नदीपंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान
2व्यास परियोजनाव्यास नदीपंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा राजस्थान
3इंदिरा गांधी नहर परियोजनासतलज नदीपंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान
4चम्बल परियोजनाचम्बल नदीराजस्थान व मध्य प्रदेश
4राणा प्रताप सागरचम्बल नदीराजस्थान
5जवाहर सागर बाँधचम्बल नदीराजस्थान
6माही परियोजनामाही नदीराजस्थान
7सरदार सरोवर परियोजनानर्मदा नदीमध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान

चम्बल बहुउद्देशीय परियोजना

राज्यों की परियोजना – राजस्थान व मध्य प्रदेश (50:50) की संयुक्त परियोजना है।

इस परियोजना में चार बाँधों का निर्माण किया गया है, जो तीन चरणों में बनाये गये।

  • प्रथम चरण
    • गाँधी सागर बाँध, मंदसौर (मध्य प्रदेश
    • कोटा बैराज, कोटा – इस परियोजना का कोटा बैराज बाँध एकमात्र सिंचाई बाँध है जिस पर राजस्थान में 8 लिफ्ट नहरें निकाली गई है। जिससे सर्वाधिक सिंचाई बूंदी जिले में होती है।
  • द्वितीय चरण
    • राणा प्रताप सागर बाँध, रावतभाटा (चित्तौड़गढ़)
  • तृतीय चरण
    • जवाहर सागर बाँध, बोरावास (कोटा)

भाखडा नाँगल बहुउद्देशीय परियोजना

राज्यों की परियोजना – पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान तीन राज्यों की संयुक्त परियोजना है।
राजस्थान का सर्वाधिक लाभान्वित होने वाला जिला – हनुमानगढ़

सतलज नदी पर हिमाचल प्रदेश में भाखड़ा बाँध तथा पंजाब में नांगल बाँध बनाये गये है। पण्डित जवाहर लाल नेहरू द्वारा भाखड़ा बाँध को चमत्कारी विराट वस्तु की संज्ञा दी गई थी। हिमाचल प्रदेश में भाखड़ा बाँध से पहले गोविन्द सागर नामक झील स्थित है। भाखड़ा नाँगल भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना है। भाखडा बाँध विश्व का दूसरा एवं एशिया का सबसे ऊँचा कंक्रीट निर्मित गुरुत्वीय बाँध है। राजस्थान को भाखडा नाँगल परियोजना से पंजाब सरकार व राजस्थान सरकार के मध्य 1959 में हुए समझौते के तहत 15.52% हिस्सा (जल व विद्युत दोनों का) प्राप्त होता है।

व्यास परियोजना

राज्यों की परियोजना – पंजाब, राजस्थान व हरियाणा की संयुक्त परियोजना है।
यह सतलज, रावी व व्यास नदियों के जल उपयोग करने हेतु पंजाब, राजस्थान व हरियाणा की संयुक्त परियोजना है। इसमें व्यास नदी पर हिमाचल प्रदेश में दो बाँध निर्मित है।

पंडोह बाँध – राजस्थान को पंडोह बाँध पर स्थित देहर विद्युत गृह से 20 प्रतिशत विद्युत प्राप्त होती है।
पोंग बाँध – राजस्थान को इस परियोजना से अपने हिस्से का सर्वाधिक जल पोंग बाँध द्वारा प्राप्त होता है। पॉग बाँध का मुख्य उद्देश्य इंदिरा गाँधी परियोजना को शीतकाल में जल आपूर्ति बनाए रखना है। राज्य को पोंग विद्युत गृह से 59 प्रतिशत विद्युत और इंदिरा गाँधी नहर हेतु जल उपलब्ध होता है।

रावी व्यास नदी जल विवाद के हल हेतु राजीव लोंगोवाला समझौते के तहत 1986 में गठित इराडी कमीशन द्वारा राजस्थान के लिए 86 लाख एकड़ फीट पानी का अतिरिक्त हिस्सा निर्धारित किया गया था।

माही बहुउद्देशीय परियोजना

राज्यों की परियोजना – राजस्थान 45% व गुजरात 55% राज्यों की संयुक्त परियोजना है।
राजस्थान का सर्वाधिक लाभान्वित होने वाला जिला – बाँसवाड़ा
इस परियोजना में तीन बाँधों का निर्माण किया गया है

  • कडाना बाँध (गुजरात)
  • माही बजाज सागर (बोरखेड़ा)
  • कागदी पिकअप बाँध (रामपुरा, बाँसवाड़ा) – कागदी पिकअप बाँध से दो नहरें भीखाभाई सागवाडा तथा बाई आनन्दपुरी निकाली गई है।

इस परियोजना में 2 जल विद्युत गृह घाटोल व गानोड़ा द्वारा विद्युत उत्पादन की जाती है। उत्पादित कुल विद्युत ऊर्जा राजस्थान द्वारा ही उपयोग की जाती है। यह परियोजना आदिवासी क्षेत्र की सबसे बड़ी परियोजना है।

इंदिरा गांधी नहर परियोजना

  • इंदिरा गांधी नहर परियोजना

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