बाणगंगा नदी – सहायक नदियाँ, बांध

बाणगंगा नदी – सहायक नदियाँ, बांध

बाणगंगा नदी का उद्गम जयपुर जिले की बैराठ की पहाड़ियों से होता है। यह राजस्थान के तीन जिलों जयपुर, दौसा एवं भरतपुर में बहती है। इसके अन्य नाम- अर्जुन की गंगा, ताला नदी,रूणिडत नदी है। राजस्थान की दूसरी नदी बाणगंगा है जो अपना जल सीधे ही यमुना नदी को ले जाती है। इस नदी पर जयपुर में जमवा रामगढ़ बांध बना हुआ है। यह उत्तरप्रदेश में आगरा के समीप फतेहबाद नमक स्थान पर यमुना नदी में मिल जाती है।

बाणगंगा नदी संक्षिप्त सारणी

उद्गमजयपुर जिले की बैराठ की पहाड़ियों से
लम्बाई380 किमी.
मुहानाआगरा के समीप फतेहबाद में यमुना नदी में
बहाव क्षेत्रराजस्थान: जयपुर, दौसा एवं भरतपुर
उत्तर प्रदेश:
दाईं और से प्रमुख सहायक नदियाँगुमटी नाला,सुरी नदी
बाईं और से प्रमुख सहायक नदियाँपलासन,सँवान
प्रमुख बाँधजमवा रामगढ़ बांध(जयपुर)

पौराणिक कथा


महाकाव्य महाभारत के अनुसार पांडवो ने अपने 12 वर्ष के वनवास के पश्चात् 1 वर्ष का अज्ञातवास राजा विराट के राज्य बैराठ में बिताया था। तब उन्होंने अपने दिव्य अस्त्र शस्त्रों को बैराठ के पास मैड़ के जंगल के शमी वृक्ष पर छुपाया था। वनवास पूरा होने के पश्चात् अर्जुन ने छुपाए हुए दिव्य अस्त्र शस्त्रों को गंगा जल से शुद्ध करने हेतु उसी शमी वृक्ष के पास गंगा मैया का आह्वाहन किया और धरती में तीर चलाया तब वहां गंगा नदी प्रकट हो गई थी इसी कारण इसे बाणगंगा या अर्जुन की गंगा से सम्बोधित किया जाता है।यह स्थान बाणगंगा मेले के लिए प्रसिद्ध है, जो हर साल वैशाख की पूर्णिमा (अप्रैल-मई) को आयोजित होता है।

बाणगंगा की सहायक नदियाँ

सूरी नदी

  • सूरी नदी दौसा के कांस्ट गाँव के पास की पहाड़ियों में निकलती है और कल्लई गाँव के पास बाणगंगा में मिल जाती है।


सँवान नदी

  • सँवान नदी अलवर जिले के अंगरी गाँव के पास की पहाड़ियों से निकलती है और जुठिआरा गाँव के पास बाणगंगा में मिल जाती है।

पलासन नदी

  • पलासन नदी अलवर जिले के राजपुरा गाँव के पास की पहाड़ियों से निकलती है और गाँव इण्डाना के पास बाणगंगा में मिल जाती है।

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