राजस्थान में सिंचाई की स्थिति, प्रमुख साधन, योजनायें, परियोजनाएँ और विभाग

राजस्थान में सिंचाई की स्थिति, प्रमुख साधन, योजनायें, परियोजनाएँ और विभाग

राजस्थान में सिंचाई की स्थिति & राजस्थान में सिंचाई के प्रमुख साधन |

राजस्थान राज्य क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है। यह एक कृषि प्रधान राज्य है जहाँ जीवन स्तर के लिए लोग कृषि पर निर्भर करते है तथा कृषि विकास सिंचाई पर निर्भर है। राज्य में देश के कुल सतही जल का मात्र 1.16 प्रतिशत जल उपलब्ध है। राज्य का लगभग 61.11 प्रतिशत हिस्सा मरुस्थल है। यहाँ वर्षा का वार्षिक औसत 20 सेमी. है। राज्य में कृषि योग्य भूमि का 2/3 भाग वर्षा पर निर्भर करता है। वर्षा की कमी तथा अनियमितता के काऱण सिंचाई के लिए कृत्रिम संसाधनों का प्रयोग किया जाता है।

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राजस्थान में सिंचाई की स्थिति:

राजस्थान में कुल 42.91 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई गयी है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में दिसम्बर, 2020 तक 9,504 हैक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधाओं का सृजन किया गया है।

  • राजस्थान में सर्वाधिक सिंचाई क्रमशः गंगानगर व हनुमानगढ़ जिलों में तथा न्यूनतम राजसमंद जिले में होती है।
  • सिंचित क्षेत्र के प्रतिशत के आधार पर चुरू जिले में सबसे कम सिंचित क्षेत्रफल है।

राजस्थान में सिंचाई के प्रमुख साधन:

नलकूप व कुआं – 66 %

राजस्थान में कृषि मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर है तथा मानसून की अवधि भी कम है। मौसम की स्थिति अस्थिर होने के कारण किसानों को कृषि हेतु वर्षा और भूमिगत जल दोनों पर निर्भर रहना पड़ता है।

  • कुओं एवं नलकूपों से सिंचाई जयपुर (सर्वाधिक), भरतपुर, अलवर, उदयपुर व अजमेर जिलों में होती है।
  • जैसलमेर के पूर्व में स्थित चन्दन नलकूप मीठे पानी का “थार का घड़ा” कहलाता है।

नहर – 32%

  • भारत में सर्वाधिक सिंचाई नहरो द्वारा (लगभग 39% भाग) होती है।
  • राज्य में नहरों द्वारा सिंचाई श्रीगंगानगर ( सर्वाधिक), हनुमानगढ़, जैसलमेर, भरतपुर, कोटा, बूंदी, बारां, सिरोही, डूंगरपुर, बांसवाड़ा व चुरू जिलों में होती है।

तालाब – 0. 6 %

  • राजस्थान के दक्षिणी एवं दक्षिणी-पूर्वी भागों में तालाबों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई होती है।
  • राज्य में तालाबों द्वारा सिंचाई भीलवाड़ा (सर्वाधिक), उदयपुर, पाली, राजसमंद, चितौड़गढ़, कोटा, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, बूंदी, टोंक आदि जिलों में होती है।

अन्य साधन – 1.4 %

  • अन्य साधनों में नदी नालों को सिंचाई के लिए प्रयुक्त किया जाता है।
  • जैसलमेर में सिंचाई के लिए तालाबों के स्थान पर खड़ीन का उपयोग किया जाता है।
  • राज्य में झरनों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई बांसवाड़ा जिले में होती है।

राजस्थान में सिंचाई की परियोजनाएं

परियोजनाओं को सिंचित के क्षेत्रफल की दृष्टि से तीन वर्गों में विभाजित किया गया है:

  • लघु सिंचाई परियोजनाएं –2000 हैक्टेयर तक भूमि सिंचित करने वाली परियोजनाएं इस वर्ग में शामिल  की जाती हैं। इनका योगदान सर्वाधिक है।
  • मध्यम सिंचाई परियोजनाएं – 2000 से 10000 हैक्टेयर भूमि सिंचित करने वाली परियोजनाएं इस वर्ग में शामिल की जाती हैं।
  • वृहद् सिंचाई परियोजनाएं – 10000 हैक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित करने वाली परियोजनाएं इस वर्ग में शामिल की जाती हैं।

राजस्थान में सिंचाई संबंधित योजनायें

प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (पी.एम.के.एस.वाई)

  • इस योजना का नोडल विभाग उद्यानिकी विभाग है तथा कृषि एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा विभिन्न गतिविधियां क्रियान्वित की जा रही है।
  • केन्द्रीयांश एवं राज्यांश का वित्त पोषण अनुपात 60:40 है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-सूक्ष्म सिंचाई (पी.एम.के.एस.वाई.-एम.आई.)

  • राज्य में जल एक सीमित एवं बहुमूल्य संसाधन है। इस दृष्टि से फसल उत्पादकता बढ़ाने एवं पानी को बचाने के लिए लघु सिंचाई पद्धति में ड्रिप एवं फव्वारा सिंचाई पद्धति, प्रभावी जल प्रबन्धन की व्यवस्था है।
  • इसमें सभी श्रेणी के कृषकों के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार का अनुपात 60:40 है।
  • इन पद्धतियों के समुचित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020-21 में विभिन्न श्रेणी के कृषकों को सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों पर अनुदान दिया जा रहा है, इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त अनुदान भी दिया जा रहा है।
  • दिसम्बर, 2020 तक राज्य का 13,755 हैक्टेयर क्षेत्र ड्रिप, मिनी फव्वारा संयंत्रों एवं 28,526 हैक्टेयर क्षेत्र फव्वारा सिंचाई के अन्तर्गत आता है।

सौर ऊर्जा आधारित पम्प परियोजना (प्रधानमंत्री ‘कुसुम’ योजना कम्पोनेंट ‘बी’)

  • वर्ष 2019-20 से भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा पी.एम. कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महा-अभियान) कम्पोनेन्ट-बी स्टैण्ड अलोन सौर ऊर्जा पम्प संयंत्र योजना क्रियान्वित की जा रही है।
  • जिसमें 3 एचपी से 10 एचपी क्षमता तक के सौर ऊर्जा पम्प संयंत्रों की स्थापना के प्रावधान के साथ अधिकतम 7.5 एचपी क्षमता तक के पम्प हेतु अनुदान देय है।
  • राज्य में वर्ष 2010-11 से वर्ष 2018-19 तक 40,224 सौर ऊर्जा पम्प संयंत्र स्थापित करवाये जा चुके है जिससे लगभग 161 मेगावाट विद्युत का उत्पादन हो रहा है एवं लगभग 1,00,000 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है।
  • इस योजनान्तर्गत कुल 60 प्रतिशत (केन्द्रीयांश 30 प्रतिशत, राज्यांश 30 प्रतिशत) अनुदान देय है।
  • वर्ष 2020-21 में- कुल 25,000 सौर ऊर्जा संयंत्रों के लक्ष्यों के विरूद्व दिसम्बर, 2020 तक 5,011 सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना हो चुकी है।

राजस्थान में सिंचाई संबंधित विभाग

  • जल संसाधन विभाग
  • राज्य की अर्थव्यवस्था में जल संसाधन विभाग का वृहद, मध्यम एवं लघु सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से राज्य के अल्प जल संसाधनों के दोहन, उपयोग एवं प्रबंधन का महत्वपूर्ण योगदान है।

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