राजस्थान सरकार के उपक्रम

राजस्थान सरकार के उपक्रम

राजस्थान सरकार के उपक्रम

औद्योगिक विकास के लिए राजस्थान सरकार के उपक्रम


उद्योग व वाणिज्य विभाग

मुख्यालय – जयपुर
राज्य में औद्योगिक विकास के लिए उद्योग विभाग के नेतृत्व में कई संस्थानों के माध्यम से सार्वजनिक नीतियां एवं सुधार क्रियान्वित किए जाते हैं। उद्योग विभाग राज्य में उद्योगों एवं हस्तशिल्प के प्रोत्साहन तथा औद्योगिक गतिविधियों के संचालन हेतु आवश्यक मार्गदर्शन, सहायता एवं सुविधाएं प्रदान करने के लिए नोडल विभाग है। वर्तमान में, उद्यमियों को इनपुट तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने हेतु 36 जिला उद्योग केन्द्र(DIC) एवं 8 उप-केन्द्र कार्यरत हैं। उद्यमियों की सुविधा हेतु जयपुर, अजमेर एवं जोधपुर में एम.एस.एम.ई. निवेशक सुविधा केन्द्र (एम.आई.एफ.सी.) की स्थापना की गयी है, ताकि उद्यमियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवाई जा सके।

विभाग के मुख्य कार्य:

  • लघु उद्योगों को बढ़ावा देना, उनके उत्पादों के विपणन में सहायता करना
  • नमक क्षेत्रों का विकास
  • हस्तशिल्प कारीगरों का विकास, हथकरघा का विकास
  • विभाग राज्य में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए विभिन्न रियायतें, सुविधाएं और सहायता भी प्रदान करता है।

राजस्थान लघु उद्योग निगम लिमिटेड, राजसीको (RSIC)

मुख्यालय – जयपुर (राजस्थान)
स्थापना – 1961

राजस्थान लघु उद्योग निगम लिमिटेड (RSIC) का जन्म कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत वर्ष 1961 में राजस्थान सरकार के उपक्रम के रूप में हुआ और 1975 में RSIC को पब्लिक लिमिटेड कंपनी का दर्जा दिया गया।

RSIC के प्रमुख कार्य:

  • हस्तशिल्प:

RSIC राज्य में उत्पादित हस्तशिल्प को बढ़ावा देने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। निगम शिल्पकारों को उत्पादों के विपणन के लिए डिजाइन और सुविधाएं प्रदान करके उनकी सहायता करता है। RSIC न केवल शिल्पकारों की आय बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि उन्हें उनकी अच्छी-खासी पहचान के लिए प्रेरित करता है और उन्हें विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित करता है। राजस्थान के मास्टर क्राफ्ट्समैन को हस्तशिल्प में उत्कृष्टता और हस्तशिल्प क्षेत्र में योगदान के लिए राज्य पुरस्कार मिला है।

राजस्थली एम्पोरियम – राजस्थान लघु उद्योग निगम लिमिटेड (RSIC) का शोरूम है जो पूरे भारत में शाखाओं के साथ एक विशेष बिक्री आउटलेट है।

  • एक्सपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज:

इन्लैण्ड कन्टेनर डिपो(ICD)/शुष्क बन्दरगाह

  1. मानसरोवर, जयपुर
  2. बोरानाड़ा, जोधपुर
  3. भिवाड़ी, अलवर – वर्तमान में गैर-परिचालन हैं।
  4. भीलवाड़ा – वर्तमान में गैर-परिचालन हैं।
  5. खेमली, उदयपुर – निर्माणाधीन

एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स

  1. सांगानेर, जयपुर
  •  रॉ मैटेरियल का वितरणनिगम एसएसआई इकाइयों को कच्चा माल – लोहा और इस्पात और कोयला उपलब्ध करा रहा है। 
  • एसएसआई उत्पादों की मार्केटिंग इस्पात उत्पादों, स्टील फर्नीचर, तम्बू और तिरपाल, पॉलिथीन बैग, कांटेदार तार और कोण लोहे के उत्पादों के लिए निगम एसएसआई इकाइयों को विपणन सहायता प्रदान कर रहा है।

राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास व विनियोग निगम(RIICO)

स्थापना – 1 जनवरी, 1980

28 मार्च, 1969 को कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत स्थापित सरकारी उद्यम राजस्थान राज्य औद्योगिक और खनिज विकास निगम (RSIMDC) को 1 जनवरी, 1980 को विभाजित कर राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास व विनियोग निगम लिमिटेड (Rajasthan State Industrial Development & Investment Corporation Limited, RIICO) और राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम (RSMDC) की स्थापना की गई।

  • RIICO ने औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना करके राजस्थान राज्य के औद्योगीकरण की जिम्मेदारी उठाई है।
  • RIICO ने औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए राज्य भर में 348 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया है।औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली, स्ट्रीट लाइट, पानी की आपूर्ति और सड़क जैसी सभी बुनियादी ढांचागत सुविधाएं हैं।
  • यह संस्था बड़े, मध्यम और छोटे पैमाने की परियोजनाओं को ऋण प्रदान करके एक वित्तीय संस्थान के रूप में भी कार्य करता है।
  • रीको ने औद्योगिक क्षेत्रों के विकास और प्रबंधन को संचालित करने के लिए पूरे राजस्थान में 28 क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किए हैं।

रीको ने विभिन्न क्षेत्र विशिष्ट औद्योगिक पार्क/जोन भी विकसित किए हैं। ऐसे कुछ प्रमुख पार्क हैं:

  • रत्न और आभूषण क्षेत्र(Gems and Jewellery zone) – जयपुर
  • IT पार्क – जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर
  • वस्त्र पार्क – जयपुर
  • बायोटेक्नोलाॅजी पार्क – सीतापुरा(जयपुर), भिवाड़ी(अलवर)
  • एग्रो फूड पार्क(Agro Food Parks) – कोटा, जोधपुर, श्रीगंगानगर और अलवर में
  • ऑटो जोन, केबल जोन, गारमेंट जोन (Auto Zone, Cable zone, Garment Zone) – पथरेडी(भिवाड़ी)
  • चमड़ा काम्पलेक्स – मानपुरा- माचेड़ी, जयपुर
  • रीको के निर्यात संवर्धन औद्योगिक पार्क और विशेष आर्थिक क्षेत्र(Special Economic Zones) – जयपुर, जोधपुर और नीमराना में
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र(Special Economic Zones) – RIICO की सहायता से राजस्थान क्षेत्र आधारित विशेष औद्योगिक जोन स्थापित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
    • महिद्रा वल्र्ड सिटी, जयपुर – सुचना प्रौद्योगिकी हेतू
    • महिद्रा वल्र्ड सिटी, जयपुर – हेण्डीक्राफ्ट हेतू
    • महिन्द्रा वल्र्ड सिटी, जयपुर – ओटो मोबाइल हेतू
    • सीतापुरा फेज -1, जयपुर – जेम्स एण्ड ज्वैलरी हेतू
    • सीतापुरा फेज -2, जयपुर – जेम्स एण्ड ज्वैलरी हेतू
    • बोरानाड़ा, जोधपुर – हैण्डीक्राफ्ट हेतू
  • पहला जापानी पार्क – नीमराना (अलवर) में तथा घीलोठ (अलवर) में रीको द्वारा दूसरा जापानी पार्क स्थापित किया जा रहा है।
  • घीलोट औदयोगिक केन्द्र – रीको व कोरिया ट्रेड इन्वेस्टमेन्ट (अलवर) प्रमोशन एजेन्सी (कोटरा) की संयुक्त भागीदारी में घीलोट (अलवर) में कोरियन निवेश क्षेत्र विकसित किया जा रहा है।

राजस्थान वित्त निगम

स्थापना – 17 जनवरी 1955
राजस्थान वित्त निगम (R.F.C.) की स्थापना राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 के अन्तर्गत वर्ष 1955 में की गई। वित्त निगम की स्थापना का मुख्य उद्देश्य राज्य में नवीन उद्योगों की स्थापना, विद्यमान उद्योगों के विस्तारीकरण एवं नवीनीकरण हेतु 2000 रु. से लेकर 20 करोड़ रु. तक का ऋण वित्तीय सहायता के रूप में उपलब्ध कराना है। आर.एफ.सी. ने राजस्थान में औद्योगिकीकरण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका/अस्तित्व बना लिया है।

दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डी.एम.आई.सी.)

डी.एम.आई.सी.
डी.एम.आई.सी.

दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना जापान की वित्तीय तथा तकनिकी सहायता से क्रियान्वित 90 बिलियन US डॉलर की महत्वकांशी परियोजना है। इसमें दादरी (उत्तर प्रदेश) और जवाहर लाल नेहरू पोर्ट, मुम्बई के बीच एक वैस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी कुल लम्बाई लगभग 1,483 किमी. है। जिसका लगभग 39 प्रतिशत भाग राजस्थान से होकर गुजरता है। DMIC राजस्थान के 7 जिलों (अलवर, सीकर, नागौर, जयपुर, अजमेर, पाली व सिरोही) से होकर गुजरेगी

डी.एम.आई.सी. परियोजना भारत की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य नए औद्योगिक शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना एवं आधारभूत ढांचे को अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी के रूप में परिवर्तित करना है। फ्रेट कॉरिडोर के दोनों तरफ लगभग 150 किमी. के प्रभाव क्षेत्र को दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में विकसित किये जाने हेतु चयन किया गया है। प्रथम चरण में खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र (के.बी.एन.आई.आर.) एवं जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र (जे.पी.एम.आई.ए.) को विकसित किया जा रहा है।

खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र

खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र लगभग 165 वर्ग किमी. का क्षेत्र है और इसमें अलवर जिले के 42 गाँव सम्मिलित हैं। खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र के लिए विस्तृत विकास योजना तैयार की गयी है और इसे अन्तिम रूप दिया गया है। इसके प्रथम चरण (फेज़-1ए) में 532.30 हैक्टेयर भूमि एवं 60 मीटर चौड़ी एप्रोच रोड़ हेतु भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है।

जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र

जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र को पाली जिले के 9 गाँव सम्मिलित करते हुए लगभग 154 वर्ग किमी. क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र को 12 अक्टूबर, 2020 को विशेष निवेश क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया गया है। रीको को जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राजस्थान विशेष निवेश क्षेत्र अधिनियम, 2016

राज्य में एवं डी.एम.आई.सी. क्षेत्र में “राजस्थान विशेष निवेश क्षेत्र अधिनियम, 2016′ के नाम से एक विशेष कानून 26 अप्रैल, 2016 को अधिसूचित किया गया और इस अधिनियम के अन्तर्गत बनाये गये नियमों को भी अधिसूचित किया गया है। राजस्थान विशेष निवेश क्षेत्र के विकास हेतु प्रवर्तन एवं निगरानी बाबत एक राज्य स्तरीय “राजस्थान विशेष निवेश क्षेत्र बोर्ड” का गठन किया गया है।
अलवर जिले की बहरोड़, मुण्डावर, नीमराना, कोटकासिम एवं तिजारा तहसीलों के 363 गाँवों को सम्मिलित करते हुए एक विशेष निवेश क्षेत्र “भिवाड़ी इंटिग्रेटेड टाउनशिप (बी.आई.टी.)” के नाम से घोषित किया गया है। तथा एक क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण “भिवाड़ी इंटिग्रेटेड विकास प्राधिकरण” (बी.आई. डी.ए.) का भी गठन किया गया है। दिनांक 28 दिसम्बर, 2020 को जारी एक अधिसूचना के द्वारा, 42 ग्रामों को पृथक कर खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र विशेष निवेश क्षेत्र घोषित किया गया है जिसके लिए रीको क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण होगा। भिवाड़ी इंटिग्रेटेड टाउनशिप के शेष 321 ग्रामों के लिए बी.आई.डी.ए. ही क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के रूप में कार्य करना जारी रखेगा।

भिवाड़ी एकीकृत विकास प्राधिकरण(BIDA)

भिवाड़ी एकीकृत विकास प्राधिकरण (Bhiwadi Integrated Development Authority, BIDA) दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक आवासीय और औद्योगिक केंद्र है। मेट्रो सिटी दिल्ली के बाहरी इलाके में भिवाड़ी सबसे तेजी से बढ़ता औद्योगिक शहर है। एनसीआर और राजस्थान का प्रमुख औद्योगिक शहर भिवाड़ी हैं, जिसमें भिवाड़ी, चोपांकी और खुशकेरा नाम के 3 औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।

ग्रामीण गैर कृषि विकास एजेंसी (RUDA)

मुख्यालय – जयपुर (राजस्थान)
स्थापना – नवम्बर, 1995

रूडा की स्थापना एक स्वतंत्र अभिकरण के रूप में राज्य में ग्रामीण गैर कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक स्वतंत्र एजेन्सी के रूप में की गई थी। रूडा, स्थायी आजीविका के व्यवहारिक मार्ग के रूप में दस्तकार परिवारों को स्वरोजगार प्रदान करने के अवसर को बढ़ावा देने के लिए उप क्षेत्रीय, एकीकृत एवं क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण का अनुसरण करता है। रूडा को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1958 के तहत पंजीकृत किया गया है, जो इसे अपने कामकाज में एक निश्चित स्वायत्तता और लचीलापन देता है। रूडा प्रमुख रूप से तीन उप क्षेत्रों के अन्तर्गत अपनी गतिविधियां संचालित करता है:

  • चमड़ा
  • ऊन एवं वस्त्र
  • लघु खनिज (एस.सी.पी.)

राज्य के दस्तकारों के विकास के लिए रूडा विभिन्न सुधारों को लागू करता है, जिसमें कौशल वृद्धि, तकनीकी विकास एवं प्रसार, डिजाइन एवं उत्पाद विकास, मेलों और प्रशिक्षण शिविरों के आयोजन के माध्यम से ऋण और बाजार सुविधा/सहायता शामिल है।

भौगोलिक संकेतक (जी.आई.) पंजीकरण

बौद्धिक सम्पदा अधिकार पहल के तहत पोकरण पोटरी, ब्ल्यू पोटरी, कोटा डोरिया तथा सांगानेर एवं बगरू हैण्ड ब्लॉक प्रिन्टिंग जैसे शिल्प के लिए रूडा ने जी.आई. (भौगोलिक संकेतक) पंजीकरण प्राप्त किया है।

राजस्थान राज्य हथकरघा विकास निगम(RSHDC)

स्थापना – 1984
मुख्यालय – जयपुर

राजस्थान के सूती हथकरघा वस्त्र क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1984 में राजस्थान राज्य हथकरघा विकास निगम(Rajasthan State Handloom Development Corporation, RSHDC) का गठन किया गया था। पारंपरिक बुनकरों और कारीगरों के आधुनिकीकरण व व्यक्तिगत क्षेत्र के बुनकरों के प्रशिक्षण एवं उत्पादों के विपणन में सहायता तथा कच्चा माल उपलब्धकराकर राज्य में हथकरघा क्षेत्र का विकास करना इसका उद्देश्य है।

RSHDC के मुख्य कार्य:

  • डिजाईन विकास कार्यक्रम
  • तकनीकी उन्नयन कार्यक्रम
  • मेलों/प्रदर्शनियों में भागीदारी
  • प्रचार-प्रसार
  • विपणन प्रोत्साहन के लिये बुनकरों से वस्त्रों की खरीददारी
  • हाथकर्ण वस्त्रों की बिक्री

राजस्थान राज्य बुनकर सहकारी संघ (RRBSS)

स्थापना – 26 अगस्त, 1957

राजस्थान में सहकारिता के माध्यम से हथकरघा उद्योग से जुड़े बुनकरों के चहुंमुखी विकास एवं उनकी समस्याओं के निराकरण हेतु राज्य की शीर्ष सहकारी संस्था के रूप में RRBSS की स्थापना की गई। यह राज्य की हथकरघा सहकारी समितियों के लिए शीर्ष विपणन निकाय है।

विशेष संस्थान

क्षेत्र विशेष के विकास हेतु राज्य द्वारा विशेष संस्थाओं का विकास किया गया है जो निम्न हैं –

  • सिरेमिक जोन – घीलोट (अलवर)
  • स्पाईस(मसाले) पार्क – कोटा, जोधपुर
  • स्टोन पार्क – मण्डोर(जोधपुर), धौलपुर, करौली
  • कम्प्यूटर एडेड कारपेट डिजाइन सेंटर – जयपुर
  • कम्प्यूटर एडेड डिजाइन सेंटर (वस्त्र) – भीलवाड़ा
  • वुडन वेयर सर्विस सेंटर – जोधपुर
  • हैण्डलूम डिजाइन डवलपमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर – नागौर
  • हस्तशिल्प डिजाइन विकास व शोध केंद्र – जयपुर
  • मोती सेंटर फॉर ज्वैलरी डिजाइन एंड ट्रेनिंग व जेम बोर्स – जयपुर
  • राजस्थान का पहला ग्रीनटेक मेगा फुड पार्क – रुपनगढ़ (अजमेर)((देश का 13वाँ))
  • पॉवरलूम सर्विस सेंटर – किशनगढ़ व भीलवाड़ा
  • कुमारप्पा हस्तशिल्प कागज राष्ट्रीय संस्थान – सांगानेर (जयपुर)
  • सिरेमिक परीक्षण प्रयोगशाला – बीकानेर
  • वुडसीजनिंग प्लांट व कॉमन सर्विस फेसिलिटी सेंटर – जोधपुर
  • ब्रह्मगुप्त अनुसंधान एवं विकास केन्द्र – जोधपुर
  • उत्तर भारत का पहला DAP कारखाना – कपासन (चित्तौड़गढ़)
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नॉलाजी(NIFT) – जोधपुर
  • जुट पार्क – श्रीनगर (अजमेर)
  • ऊँट की खाल पर मुनव्वती की कला हेतु प्रशिक्षण केन्द्र – बीकानेर
  • सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलॉजी (CIPET) – जयपुर

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